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Archive for September, 2009

From someone to someone

September 1, 2009 Leave a comment

मृगतृष्णा

यूँ काटने से कटते नहीं, ज़िंदगी के हर रास्ते
ढूँढने पर तो मिलते नहीं, ज़िंदगी के हर मायने
तेरे इन आँसुओं में छुपि हैं, मंन की हर बात सारी
अपनी खुशियों से ज़्यादा मुझे हैं, तेरी मुस्कान प्यारी |

क्यों करे इंतेज़ार उस पल का,
जो कभी तेरा था ही नहीं |
क्यों करे इंतेज़ार उस सावन का,
जो तेरे वास्ते कभी बरसा ही नहीं |

तो क्यों ना लूट लें, इस पल में ज़िंदगी की खुशियाँ सारी
तो क्यों ना समेट लें, हर गम को मुट्ठी में हमारे |
शायद तेरे घर से मिलते नहीं, मेरे घर के रास्ते
फिर क्यों सोचते हो शायद, वो मिल जायें जीने के वास्ते |

From someone to someone

September 1, 2009 2 comments

मृगतृष्णा

यूँ काटने से कटते नहीं, ज़िंदगी के हर रास्ते
ढूँढने पर तो मिलते नहीं, ज़िंदगी के हर मायने
तेरे इन आँसुओं में छुपि हैं, मंन की हर बात सारी
अपनी खुशियों से ज़्यादा मुझे हैं, तेरी मुस्कान प्यारी |

क्यों करे इंतेज़ार उस पल का,
जो कभी तेरा था ही नहीं |
क्यों करे इंतेज़ार उस सावन का,
जो तेरे वास्ते कभी बरसा ही नहीं |

तो क्यों ना लूट लें, इस पल में ज़िंदगी की खुशियाँ सारी
तो क्यों ना समेट लें, हर गम को मुट्ठी में हमारे |
शायद तेरे घर से मिलते नहीं, मेरे घर के रास्ते
फिर क्यों सोचते हो शायद, वो मिल जायें जीने के वास्ते |