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From someone to someone

मृगतृष्णा

यूँ काटने से कटते नहीं, ज़िंदगी के हर रास्ते
ढूँढने पर तो मिलते नहीं, ज़िंदगी के हर मायने
तेरे इन आँसुओं में छुपि हैं, मंन की हर बात सारी
अपनी खुशियों से ज़्यादा मुझे हैं, तेरी मुस्कान प्यारी |

क्यों करे इंतेज़ार उस पल का,
जो कभी तेरा था ही नहीं |
क्यों करे इंतेज़ार उस सावन का,
जो तेरे वास्ते कभी बरसा ही नहीं |

तो क्यों ना लूट लें, इस पल में ज़िंदगी की खुशियाँ सारी
तो क्यों ना समेट लें, हर गम को मुट्ठी में हमारे |
शायद तेरे घर से मिलते नहीं, मेरे घर के रास्ते
फिर क्यों सोचते हो शायद, वो मिल जायें जीने के वास्ते |

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  1. uday
    September 1, 2009 at 4:28 pm

    kya bhai shayyar ho gaya hai…….

    • upmaan
      September 1, 2009 at 4:55 pm

      aise hi dost… life boring or dull honey se rokney ke liye, bas kabhi kabhi

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