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Republic Day

फिर सोने की चिड़िया कहलाएगा ..

गणतंत्र दिवस की बेला पर
मिलकर नारा बुलंद करो |
अखंड रखेंगे सीमाओं को,
अनुसरण करेंगे
और चलेंगे,
राष्ट्र पिता के वचनो पर |

कभी अविचल, और अडिग थी,
संस्कृति, आदर्श और विचारधारा हमारी |
तरस रही  है जीवन को,
खोखली दिन प्रति दिन, अब वो हो रही |
गौरन्वित करती कभी विश्व पटल पर,
अंतिम साँसे गिन, शर्मसार अब वो हो रही |

मिलकर तुमको-हमको,
वो गौरव वापस लाना है |
सिर्फ़ बातों से नहीं,
अपने कर्मो से भी,
परचम गगम में लहराना है |

क्यों बात करें पड़ोसी मुल्कों का
और बढ़ रही विदेशी साज़िशों का |
जब अपने ही, देश को चूस रहे,
नित-नये उदाहरण दे रहे,
भ्रष्ट, भ्रष्टतम, भ्रष्टाचार का |

बहुत हुआ, अब बंद करो
करना बातें तुम बड़ी-बड़ी |
खोया अभिमान अर्जित करने को …
कस लो कमर, हो ढृढ निश्चयी,
हाथ जोड़, बन एक कड़ी,
अब समर भूमि में कूद पड़ो |

मत देखो एक-दूजे को,
प्रारंभ करेगा कौन अभी |
अग्नि भी होती प्रज्वलित,
किंचित चिंगारी से |

एक कदम तू चल बढ़ा,
मार्ग स्वयं फिर बन जाएगा |
लौटेगी  अपनी पुरानी गरिमा,
और फिर से भारत वर्ष,
सोने की चिड़िया कहलाएगा |

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Categories: Hindi Poems
  1. Tanweer Noor
    January 27, 2010 at 5:14 pm

    good one yaar

  2. Tanu
    January 28, 2010 at 12:11 am

    Oh my god….ye tume likhi hai Somu. Very well done!

    • Anupam Singh
      January 28, 2010 at 3:58 am

      ab kya kahey.. fursat mein kabhi kabhi likh bhi letey hain .. 😀

  3. Nayan
    January 29, 2010 at 8:45 pm

    abey kaise itni gehri baatein likh aur soch paate ho bey….
    kuch IT walon pe bhi kavita likho dost

    • Anupam Singh
      January 31, 2010 at 5:41 pm

      he he he …. gaur farmata hun sir aapkey farmaaish per 😀

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